चीन ने अब नेपाल के रूई गांव में किया कब्जा

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नेपाल चीन के फंद में फंस ही चुका है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भले ही चीन के इशारे पर भारत के इलाकों के नक्शे बदलने में लगे हों, लेकिन, चीन ने अब नेपाल के इलाके पर ही कब्जा शुरू कर दिया है। चीन की जो चालबाजी अब सामने आ रही है, वह उसके माओत्से तुंग के जमाने की रणनीति के ही मुताबिक है। नेपाली प्रधानमंत्री ओली नक्शा बदलकर भारत के इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर नेपाली दावा करने में लगे हुए हैं, उधर चीन ने धीरे-धीरे नेपाल के गांवों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। चीन ने नेपाल के जिस गांव में लाल झंडे गाड़ दिए हैं, वो नेपाल के उत्तरी गोरखा क्षेत्र का रुई गांव है।

नेपाल मामलों के जानकारों का कहना है कि नेपाल सरकार और वहां के बुद्धिजीवी इस वक्त भारत के नाम पर अपनी जनता को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर नेपाली कब्जे के सपने दिखा रहे हैं, जबकि नेपाल की सरकार ने रुई गांव पर चीन के अतिक्रमण की बात जनता से छिपा रखी है। गोरखा इलाके का रुई गांव आज की तारीख में तिब्बत के अधीन हो चुका है, जो चीन के अवैध कब्जे में है। हालांकि, यह गांव अभी भी नेपाल के नक्शे में शामिल है, लेकिन उसपर ड्रैगन की दादागीरी चल रही है। चीन ने गांव के निशान वाले सारे पिलर उखाड़ फेंके हैं, जिससे कि वह अपने गैर-कानूनी कब्जे की बात को दबा सके। जबकि, तथ्य ये है कि गोरखा जिले के राजस्व दफ्तर में वह गांव आज भी नेपाल का है और रुई के लोगों ने सरकार को जो लगान दिए हैं, उसका भी पूरा रेकॉर्ड मौजूद है।

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लगभग 60 वर्षों तक नेपाल शासन के अधीन रहने वाले रुई गांव पर चीन के कब्जे वाली खबर से अब नेपाल में भी हलचल मच गई है। जानकारी के मुताबिक चीन ने वहां के पिलरों में 2017 में ही हेरफेर कर लिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के साथ चीन के इशारे पर उछलने वाली केपी शर्मा ओली की सरकार चीन की दमनकारी नीति पर इतने वर्षों से क्यों खामोश बने हुए हैं। क्योंकि, नेपाली अखबार अन्‍नपूर्णा पोस्‍ट के मुताबिक रुई गांव वर्ष 2017 से तिब्‍बत के स्‍वायत्‍त क्षेत्र का हिस्‍सा हो चुका है। इस गांव में अभी भी 72 घर हैं। जो नेपाल के रेकॉर्ड में रहने के बावजूद वामपंथी तानाशाही सहने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि ओली इस सच्चाई को क्यों दबाए रखना चाहते हैं।

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