करोना से लडने के लिए इस्तेमाल की जा रही है पेट के कीड़े मारने वाली दवा

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राज्य में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों, पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों और कंटेनमेंट जोन में रह रहे लोगों को पेट के कीड़े मारने की दवा आइवरमैक्टिन खिलाने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने सोमवार को दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया कि आइवरमैक्टिन को देश, विदेश में कई जगह कोरोना से बचाव की दवाई के रूप में खिलाया जा रहा है। इसके बाद अब राज्य सरकार ने भी हाई रिस्क जोन में रह रहे लोगों को यह दवाई खिलाने का निर्णय लिया है।

इसके तहत किसी पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने वाले एक वयस्क व्यक्ति को 12 मिली ग्राम की एक गोली पहले और सातवें दिन रात को खाना खाने के दो घंटे के बाद खानी है।
कोविड अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों व संपर्क में आने वाले अन्य स्टाफ को 12 मिलीग्राम की एक गोली पहले, सातवें और तीसवें दिन रात को खाना खाने के दो घंटे बाद खानी है। एक महीने यह ट्रीटमेंट चलने के बाद फिर हर महीने एक गोली खानी है।
इसके साथ ही आदेश में कहा गया है कि कंटेनमेंट जोन में पॉजिटिव व्यक्ति के करीब के लोगों को पहले और सातवें दिन रात खाना खाने के बाद एक 12 मिलीग्राम की एक गोली खानी है।

स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आये लोगों, स्वास्थ्य कर्मियों और कंटेन्मेंट जोन में रह रहे लोगों को यह दवाई सरकार की ओर से निशुल्क दी जाएगी। यदि कोई दवा स्टोर से दवा खरीदकर खाना चाहता है तो इसकी भी इजाजत होगी। लेकिन उन्होंने कहा कि यदि दवाई मेडिकल स्टोर से खरीद रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह से ही खाएं।

परीक्षा देने आए बच्चो में एक 

पॉज़िटिव मचा हड़कंप

गर्भवती व दो साल से कम उम्र के बच्चों को न खिलाएं
सरकार की ओर से किए गए आदेश में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं एवं दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवाई नहीं खिलाई जाएगी। इधर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि अन्य लोगों को भी डॉक्टर या किसी स्वास्थ्य कर्मी की सलाह के बाद ही यह गोली खानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डोज की मात्रा वजन के अनुसार तय होती है। ऐसे में इस संदर्भ में डॉक्टर से परामर्श लेना ठीक रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने कोविड अस्पतालों के लिए भी मरीजों को भर्ती करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें मरीजों की श्रेणी तय करते हुए ट्रीटमेंट शुरू करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।

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