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ग्राफिक ऐरा के छात्र ने पिता के रिवॉल्वर से खुद को मारी गोली

ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे छात्र ने आज तड़के अपने पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली मार दी 22 वर्षीय एक छात्र ने आत्मघाती कदम क्यों उठाया पुलिस भी अभी इस बारे में कुछ दावा करने से इंकार कर रही है लेकिन प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ लग रहा है पुलिस के हाथ युवक के मोबाइल फोन लगा है

पंचेश्वर क्षेत्र रौसाल रोड में वाहन गिरा गहरी खाई में

जिसके व्हाट्सएप चैटिंग में उसने मृत्यु से पहले एक नंबर पर संदेश भेजे थे वैभव नामक इस युवक ने आधी रात को व्हाट्सएप पर संदेश भेजा कि समझ नहीं आ रहा कि दिल को गोली मारो या दिमाग को इसके बाद उसने फ्री लिखा तय कर लिया है दिमाग कोई गोली मारता हूं यही संदेश वैभव का अंतिम संदेश साबित हुआ रात तकरीबन 2:45 बजे उसके बगल में सोए छोटी बहन नमन की गोली के धमाके के साथ में खुली उसने जाकर देखा तो बड़ा भाई वैभव मगर मैं खून से लथपथ पड़ा मिला इतने में उनके मां-बाप कमरे में आ गए और अंतिम सांसे गिन रहे पेड़ों को तुरंत भीमताल चिकित्सालय ले जाया गया जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया

बता दें यह मामला कुछ इतालके मोरा गांव का है यहां रहने वाले इटावा के मूल निवासी विवेक शर्मा अपने परिवार के साथ यही मकान बनाकर अपना गेस्ट हाउस चलाते हैं उनके पास अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर भी है यही रिवाल्वर उनके जवान बेटे की मौत का हथियार साबित हुई हालांकि वैभव ने सुसाइड क्यों किया पुलिस इस मामले में जांच पड़ताल कर रही है लेकिन उसके मोबाइल पर छिपे व्हाट्सएप संदेश ने पुलिस को एक दिशा तो दे ही दी है

करोना संक्रमित सचिवालय के अनुसचिव की मौत

कोरोना संक्रमित उत्तराखंड सचिवालय के अनुसचिव हरि सिंह का निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से सचिवालय में शोक की लहर है। सभी कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालय कक्षों में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।

हरि सिंह कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के साथ भी रहे हैं। वह काफी मिलनसार और विनम्र थे। वर्तमान में औद्योगिक विकास(खनन) विभाग में तैनात थे। पिछले दिनों उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान वहां उनका निधन हो गया। सचिवालय में कोरोना संक्रमित किसी कर्मचारी की मौत का यह पहला मामला है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरि सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति व शोक संतप्त परिवारजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की है। उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी और महासचिव राकेश जोशी ने भी हरि सिंह के निधन दुख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय चार (घोषणा) के अनुभाग अधिकारी भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री कृष्ण सिंह ने अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दी। सचिवालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अनुभाग को बंद कर दिया है। साथ ही अनुभाग के बाकी स्टाफ को हाई रिस्क में होने की वजह से आइसोलेट करने का अनुरोध किया गया है। अनुसचिव व उपसचिव के कक्षों को भी सैनिटाइज किया जाएगा।

पंचेश्वर क्षेत्र रौसाल रोड में वाहन गिरा गहरी खाई में

आज जनपद चंपावत के कोतवाली पंचेश्वर क्षेत्र के अंतर्गत पंचेश्वर रोसाल रोड पर वाहन संख्या DL9C-1329 मारुतिकार 800 अनियंत्रित होकर लगभग 200 मी0 गहरी खाई में गिर गई। जिसमे चालक सहित एक अन्य व्यक्ति बैठे थे जिनकी प्रकाश सिंह अधिकारी निवासी ग्राम खकोड़ा (रेगड़ू), तहसील बाराकोट, चम्पावत, जो कि गाड़ी चालक के रूप में हुई व कमल सिंह पुत्र गुमान सिंह निवासी ग्राम खकोड़ा (रेगड़ू), बाराकोट, चम्पावत के रूप में हुई

 

करोना से लडने के लिए इस्तेमाल की जा रही है पेट के कीड़े मारने वाली दवा

सूचना मिलते ही उप निरीक्षक श्री अनुराग सिंह, थानाध्यक्ष पंचेश्वर के नेतृत्व में कोतवाली पंचेश्वर पुलिस टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों की मदद से गहरी खाई में रेस्क्यू अभियान चलाकर घायलों को रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार के बाद उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट भेजा गया ।पुलिस टीम में अनुराग सिंह थानाध्यक्ष पंचेश्वर, उ.नि. (वि.श्रे.) हरीश राम, का. बिहारीलाल, राजेंद्र गिरी, नवीन चन्द्र, पवन वर्मा, चालक गुरजीत सिंह, हे.का. ईश्वरीदत्त शर्मा चौकी रौसाल, का. रवींद्र गिरी – चौकी रौसाल मौजूद रहे

करोना से लडने के लिए इस्तेमाल की जा रही है पेट के कीड़े मारने वाली दवा

राज्य में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों, पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों और कंटेनमेंट जोन में रह रहे लोगों को पेट के कीड़े मारने की दवा आइवरमैक्टिन खिलाने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने सोमवार को दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया कि आइवरमैक्टिन को देश, विदेश में कई जगह कोरोना से बचाव की दवाई के रूप में खिलाया जा रहा है। इसके बाद अब राज्य सरकार ने भी हाई रिस्क जोन में रह रहे लोगों को यह दवाई खिलाने का निर्णय लिया है।

इसके तहत किसी पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने वाले एक वयस्क व्यक्ति को 12 मिली ग्राम की एक गोली पहले और सातवें दिन रात को खाना खाने के दो घंटे के बाद खानी है।
कोविड अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों व संपर्क में आने वाले अन्य स्टाफ को 12 मिलीग्राम की एक गोली पहले, सातवें और तीसवें दिन रात को खाना खाने के दो घंटे बाद खानी है। एक महीने यह ट्रीटमेंट चलने के बाद फिर हर महीने एक गोली खानी है।
इसके साथ ही आदेश में कहा गया है कि कंटेनमेंट जोन में पॉजिटिव व्यक्ति के करीब के लोगों को पहले और सातवें दिन रात खाना खाने के बाद एक 12 मिलीग्राम की एक गोली खानी है।

स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आये लोगों, स्वास्थ्य कर्मियों और कंटेन्मेंट जोन में रह रहे लोगों को यह दवाई सरकार की ओर से निशुल्क दी जाएगी। यदि कोई दवा स्टोर से दवा खरीदकर खाना चाहता है तो इसकी भी इजाजत होगी। लेकिन उन्होंने कहा कि यदि दवाई मेडिकल स्टोर से खरीद रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह से ही खाएं।

परीक्षा देने आए बच्चो में एक 

पॉज़िटिव मचा हड़कंप

गर्भवती व दो साल से कम उम्र के बच्चों को न खिलाएं
सरकार की ओर से किए गए आदेश में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं एवं दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवाई नहीं खिलाई जाएगी। इधर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि अन्य लोगों को भी डॉक्टर या किसी स्वास्थ्य कर्मी की सलाह के बाद ही यह गोली खानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डोज की मात्रा वजन के अनुसार तय होती है। ऐसे में इस संदर्भ में डॉक्टर से परामर्श लेना ठीक रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने कोविड अस्पतालों के लिए भी मरीजों को भर्ती करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें मरीजों की श्रेणी तय करते हुए ट्रीटमेंट शुरू करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।

परीक्षा देने आए बच्चो में एक करोना पॉज़िटिव मचा हड़कंप

कोरोना काल में परीक्षाओं की तिथि को लेकर काफ़ी लंबे समय से छात्रों और प्रशासन के बीच तनातनी का माहौल बना हुआ था, जिसके बाद केंद्र सरकार के निर्देशानुसार सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षाएं कराने की अनुमति दे दी गई। इसी दौरान आज सोमवार से कुमाऊं विश्वविद्यालय की परीक्षाएं भी शुरू कर दी गई हैं जिसमें लगभग सभी बच्चे सम्मिलित हुए। लेकिन कहते हैं ना कि ज़रा सी लापरवाही बड़ी मुसीबतों का कारण बन सकती है, कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित परीक्षाओं को सभी प्रकार की सुरक्षा प्रबंधनों के बावजूद भी आख़िरकार कोरोना का ग्रहण लग ही गया।

यह भी पढ़ें  डोकलाम

(ITBP) का जवान शहीद

बागेश्वर स्थित महाविद्यालय में परीक्षाएं शुरू होने से पहले परीक्षा में शामिल होने वाले सभी छात्र-छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिंग की गई जिसके उपरांत 24 छात्रों का टेम्परेचर मानक से अधिक निकला। इसके बाद उन सभी 24 छात्रों को अलग बैठाया गया और स्वास्थ्य विभाग की टीम को तुरंत सूचना दे दी गई जिसके बाद डाॅक्टरों की टीम द्वारा उन सभी का एंटीजन रेपिड टेस्ट किया गया। हैरानी वाली बात तब हुई जब उनमें से एक छात्र कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद मानो हड़कंप सी मच गई हो। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा छात्र को तुरंत अस्पताल लेे जाकर क्वारंटीन कर दिया गया हैं। इसके बाद छात्र के संपर्क में आए सभी लोगों का भी एंटीजन रेपिड टेस्ट कराने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।


इसके अलावा कॉलेज में आज परीक्षाओं की तैयारी में पूरी तरह से सावधानी बरती गई तथा सभी छात्रों को मास्क एवं सेेनेटाइजर के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परीक्षा में शामिल किया गया।

डोकलाम में उत्तराखण्ड (ITBP) का जवान शहीद

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में किच्छा निवासी आईटीबीपी जवान जमीर अहमद (54) की चीन सीमा से सटे डोकलाम में शहीद हो गए। बीमारी के चलते शनिवार को उनकी मौत हो गई। आईटीबीपी के अधिकारियों ने परिजनों को सोमवार दोपहर बाद तक शव के किच्छा पहुंचने की जानकारी दी है। शाम को पूरे सम्मान के साथ जवान को शव सुपुर्दे खाक किया जाएगा। जवान की मौत की सूचना से परिजनों में कोहराम मच गया है।

च्यवनप्राश खाने वालो पर भी 

करोना का …

शहीद अहमद के पुत्र सनाउल मुस्तफा ने बताया कि उनके पिता 12 दिसंबर 2019 को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे और तब से वे वहीं तैनात थे। उनसे फोन पर हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी ड्यूटी कहीं ऊंची पहाड़ियों पर लगी थी, जिसके कारण उनसे संपर्क कम हो गया था। बीते शनिवार को सुबह उन्हें आईटीबीपी के अधिकारी का फोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके पिता की अचानक तबीयत खराब हो गई थी, जिस पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

सेना के अधिकारी ने सनाउल को बताया कि शहीद जवान का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह हवाई जहाज से दिल्ली लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग से घर पहुंचाया जाएगा। जमीर अहमद की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर शहीद के कई रिश्तेदार उनके आवास पर पहुंच गए। शहीद की पत्नी नूरजहां, बेटी शहनाज और तरन्नुम के अलावा पुत्र सनाउल मुस्तफा का रो-रो कर बुरा हाल है।

च्यवनप्राश खाने वालो पर भी कोरोना का कम असर

केजीएमयू में हुए बीसीजी, प्लाज्मा व च्यवनप्राश के ट्रायल के सकारात्मक परिणाम दिखे हैं। बीसीजी के ट्रायल में शामिल हेल्थ वर्कर पर कोरोना वायरस का असर कम हुआ है तो प्लाज्मा थेरेपी से भी मरीजों की जान बच रही है। इससे चिकित्सक, विशेषज्ञों की टीम उत्साहित है। ट्रायल के नतीजों का मूल्यांकन शुरू हो गया है। हालांकि, तीन माह तक ट्रायल में शामिल लोगों पर नजर रखी जाएगी।

केजीएमयू में प्लाज्मा थेरेपी का पहला ट्रायल 26 अप्रैल को शुरू हुआ था। प्रदेश में इकलौता ट्रायल करने वाले केजीएमयू ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के तहत 12 लोगों पर ट्रायल किया। सूत्र बताते हैं कि इसमें 50 फीसदी से ज्यादा को फायदा मिला। इसके बाद करीब 50 लोगों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई, जिसमें 41 की जान बचाई गई है।
ट्रायल के सकारात्मक नतीजों को देखते हुए आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों को प्लाज्मा थेरेपी देने का निर्देश दिया है। पीजीआई में अब तक 21 मरीजों को थेरेपी दी गई, जिसमें 17 ठीक हुए हैं। लोहिया संस्थान में 10 मरीजों को थेरेपी दी जा चुकी है।

दवा सप्लायर पर उस्तरे से कि

वार, लगे 50 टाके

बीसीजी का टीका लेने वालों में वायरस का असर कम

केजीएमयू में मई में बैसिलस कालमेट गुएरिन (बीसीजी) का ट्रायल शुरू हुआ। इसमें तीन माह में 170 लोगों को शामिल किया गया। पहले समूह में सीधे संपर्क में आने वाले, दूसरे में कम संपर्क वाले और तीसरे समूह में स्वास्थ्यकर्मियों को रखा गया। सूत्र बताते हैं कि ट्रायल के सकारात्मक नतीजे मिले हैं।

सीधे संपर्क वाले कुछ लोगों पर वायरस का असर दिखा है, लेकिन 60 फीसदी से ज्यादा पर असर नहीं हुआ है। इसी तरह दूसरे और तीसरे ग्रुप वालों पर भी वायरस का असर 15 से 20 फीसदी पाया गया। फिलहाल ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन हो रहा है। ट्रायल में शामिल मरीज तीन माह तक पॉजिटिव नहीं आते हैं तो माना जाएगा कि बीसीजी का टीका वायरस रोकने में काफी हद तक कारगर है।

केजीएमयू की संक्रामक रोग यूनिट के नोडल प्रभारी डॉ. डी हिमांशु कहते हैं कि अभी सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि नतीजे सकारात्मक हैं और भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं। ट्रायल के सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजा जा रहा है।

च्यवनप्राश खाने वालों पर बहुत कम असर देखने को मिला

केजीएमयू में आयुष 64 और च्यवनप्राश का ट्रायल जून से अगस्त तक हुआ। इसे आयुर्वेद संस्थान ने तैयार किया है। इसके तहत 100 कर्मचारियों को च्यवनप्राश और आयुष 64 दवा दी गई और 100 को नहीं दी गई। दवा व च्यवनप्राश खाने और न खाने वालों की इम्युनिटी परखी गई।
आयुष मंत्रालय की ओर से कराए गए ट्रायल के सकारात्मक नतीजे मिले हैं। इसमें पाया गया कि च्यवनप्राश लेने वाले बीमार नहीं हुए। ट्रायल के इन्वेस्टिगेटर डॉ. एके सोनकर ने बताया कि परिणाम बेहतर मिले हैं। इनका मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है।

आयुर्वेदिक अस्पतालों एवं क्लीनिक्स का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत पंजीकरण…

आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों द्वारा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ कार्यालय में अनिवार्य पंजीकरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था का लम्बे समय से विरोध किया रहा है।

राजकीय​ आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड पंजीकृत के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला* द्वारा इन दोनों ही प्रकरणों में व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बतायी गयी है। उनके द्वारा दोनों ही प्रकरणों के बारे जानकारी देते हुए बताया गया कि:

वर्तमान में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत राज्य के सभी आयुष चिकित्सालयों का पंजीकरण सीएमओ कार्यालय के अंतर्गत किया जा रहा है एवं आयुष चिकित्सालयों निरीक्षण भी सीएमओ एवं आईएमए अध्यक्ष के द्वारा किया जाता है, जिनके द्वारा निरीक्षण के दौरान आयुष चिकित्सकों के साथ भेदभाव एवं उनका उत्पीड़न (सौतेला व्यवहार) किया जाता है। जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों​ का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत पंजीकरण जिला/क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के कार्यालय में ही किए जाने की व्यवस्था है। उत्तराखंड राज्य में भी ऐसी ही व्यवस्था मांग की जा रही है।

आयुष चिकित्सा पद्धति के उपचार के दौरान किसी भी प्रकार का निदानात्मक (Diagnostic), उपचारात्मक (Therapeutic) एवं टीकाकरण (Immunisation) संबधी बायोमेडिकल वेस्ट उत्सर्जित नहीं होता है, फिर भी आयुष चिकित्सालयों​ को एलोपैथिक चिकित्सालयों​ की तरह बायोमेडिकल वेस्ट मेनेजमेंट एजेंसी से अनुबंध करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि ठोस अपशिष्ट जैसे गत्ता, डिब्बा, प्लास्टिक, तेल, काष्ठ औषधीय आदि इत्यादि का प्रबन्धन नगरनिकाय की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन करने वाली एजेंसी के माध्यम से ही किया जा सकता है, इसके लिए बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन एंजेसी अनुबंध किए जाने की बाध्यता प्रतीत नहीं होती है। ऐसे में इन अस्पतालों एवं क्लीनिकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने की व्यवस्था से छूट दी जाए। कई राज्यों में केरल, दिल्ली और कर्नाटक में छूट प्राप्त है। ऐसे में यह छूट उत्तराखंड राज्य में भी दी जाए।

इस सम्बन्ध में निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखंड, देहरादून द्वारा सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा, उत्तराखंड शासन एवं रजिस्ट्रार, भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखंड को एक पत्र संख्या:3811-13/जी-387/चिकित्सा परिषद्/ 2019-20 देहरादून दिनांक 07 सितम्बर 2020 को प्रेषित किया गया है।

इसी सम्बन्ध में निर्वाचित सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद्, डॉ० महेन्द्र राणा, डॉ० चन्द्रशेखर वर्मा एवं वित्त नियंत्रक, उत्तराखंड होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड श्री अनिल जोशी ने भी सदस्य सचिव- उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अध्यक्ष- उत्तराखंड होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड, अध्यक्ष,भारतीय चिकित्सा परिषद्, उत्तराखंड, मुख्य सचिव, आयुष सचिव, एवं आयुष मंत्री को भी पत्र लिखा है। प्रान्तीय संघ अध्यक्ष डॉ० के० एस० नपलच्याल, उपाध्यक्ष डॉ० अजय चमोला एवं महासचिव डॉ० हरदेव रावत ने भी वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है।

दवा सप्लायर पर उस्तरे से किया वार, लगे 50 टाके

कोतवाली क्षेत्र के चुक्खूवाला मोहल्ले में गुरुवार की रात कुछ युवकों ने के दवा सप्लाई करने वाले युवक पर उस्तरे से ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। उसके शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसकी जान बचाई। तहरीर ने युवक की ओर से बताया गया है कि उसे लगी चोटों पर पचास से अधिक टांके लगे हैं।
पुलिस के अनुसार प्रदीप राम निवासी चुकखुवाला दवा सप्लाई का काम करता है। गुरुवार की रात 11.30 बजे वह अपने साथी को चुक्खुवाला छोड़ने जा रहा था। वहां पर खड़े कुछ युवक जो कि उसके घर के संमीप ही खड़े थे और उसे जानते भी थे। किसी बात को लेकर विवाद करने लगे। हस्तक्षेप किया और कहा कि विवाद आपस में सुलझा लो।

करोना से ढाई साल के बच्चे

के साथ 11 लोगों की मौत

इस पर सभी ने उसपर हमला कर दिया। कुछ समझ पाता तभी उसमे से अभिषेक नाम के युवक ने धारदार उस्तरा निकाला और उसके साथी विक्रम, हर्ष और सचिन ने उसे दबोच लिया। अभिषेक ने पहले गर्दन पर उस्तरा मारा, फिर चहरे, कंधे, छाती नाक, कलाई और अंगुली पर वो उस्तरे से लगातार वार करता रहा। अधिक खून बहने के कारण युवक जमीन पर गिर गया और आरोपित वहां से फरार हो गए। इस बीच कुछ लोगों ने प्रदीप को उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने बड़े जख्मों पर तुरंत पचास से अधिक टांके लगाए।

करोना से ढाई साल के बच्चे के साथ 11 लोगों की मौत

राज्य में शुक्रवार को कोरोना के 995 नये केस सामने आए हैं। 11 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई। कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 29,221 हो गई है। जबकि कुल मौत की संख्या 388 हो गई है। देहरादून में सबसे अधिक 281, यूएसनगर में 271 केस सामने आए।
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार 14 अल्मोड़ा, 7 बागेश्वर, आठ चमोली, 10 चंपावत, 161 हरिद्वार, 110 नैनीताल, 43 पौड़ी, 39 पिथौरागढ़, पांच रुद्रप्रयाग, 29 टिहरी, 17 उत्तरकाशी में नये केस सामने आए। 8237 सैंपल जांच को भेजे गए। शुक्रवार को 645 मरीज ठीक भी हुए है

संदिग्ध परिस्थितियों में सीडकुल के कर्मचारी ने लगाई फांसी

राज्य में अभी भी कुल एक्टिव केस 9294 है। डबलिंग रेट 24.80 दिन हो गया है। रिकवरी रेट 66.49 प्रतिशत पहुंच गया है। संक्रमण दर अब 6.11 प्रतिशत है। छह कोरोना पॉजिटिव मरीजों की एम्स ऋषिकेश, तीन की महंत इंद्रेश अस्पताल देहरादून, दो मरीजों की सुशीला तिवारी हल्द्वानी अस्पताल में मौत हुई।

राज्य में पिछले दस दिन में संक्रमण दर बढ़ गई है। एक से दस सितंबर के बीच देहरादून में 13805 टेस्ट हुए। इनमें 2306 केस पॉजिटिव आए। संक्रमण दर देहरादून जिले की 16.70 प्रतिशत पहुंच गई। जबकि राज्य की दर 6.11 प्रतिशत है। नैनीताल जिले की 13.21 प्रतिशत, हरिद्वार 9.34 प्रतिशत, यूएसनगर 9.23 प्रतिशत पहुंच गई है। सबसे कम संक्रमण दर पिथौरागढ़ 2.71 प्रतिशत, बागेश्वर 2.76 प्रतिशत है।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना संक्रमित एक ढाई साल के बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को कोटद्वार अस्पताल से देहरादून रेफर किया गया था। देर रात अस्पताल में वेंटिलेटर पर बच्चे की मौत हो गई। गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस प्रशासन और अस्पताल कर्मचारियों ने उसको शव को सुपुर्द ए खाक करवा दिया है। डिप्टी एमएस डॉक्टर एनएस खत्री ने बताया कि बच्चे के मल्टी ऑर्गन फैलियर होने की वजह से उसकी मौत हो गई अस्पताल में जब बच्चे को लाया गया तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी। सांस लेने में उसे कठिनाई हो रही थी।  जिम्मेदार लोगों की मदद से शव का सुपूर्द ए खाक करवाया गया है।।