उनका कहना है कि जहां वेब स्क्रैप्ड डाटा कानूनी और नियम के दायरे से सुरक्षित होते हैं, वहां हम खुद फोटो साझा कर रहे हैं। मगर यह कोई नहीं जानता कि फेशियल डाटा को कहां सुरक्षित रखा जा रहा है। भविष्य में एआइ के जरिए डाटा का फोटो का दुरुपयोग हो सकता है। साइबर सीओ का कहना है कि चैटजीपीटी यूजर्स के लिए ओपन एआइ ने यह सुविधा उपलब्ध कराई है। यह टापिक इंटरनेट मीडिया में सबसे अधिक चर्चित हो गया है।
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वहीं ग्रोक जिस तरह से सवालों का जवाब दे रहा है जो अभी लोगों का रोमांच कर रहा है। इससे संवेदनशील और भ्रामक जानकारियों के खतरे का अंदेशा बढ़ गया है। उन्होंने लोगों से इससे बचने को कहा है। ताकि भविष्य में साइबर ठगी के खतरों से बचा जा सके और अपनी फोटो का गलत प्रयोग न हो सके। क्योंकि इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि आपनी फोटो सुरक्षित है।