जिंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से अंदर तक झकझोर देती हैं। किसी प्रियजन को खोने, गंभीर दुर्घटना, हिंसा या अन्य दर्दनाक अनुभव के बाद पैदा होने वाली इस स्थिति को आमतौर पर सदमा या ‘ट्रॉमा’ कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह के गहरे मानसिक आघात का असर सिर्फ दिमाग और भावनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है?
हालिया शोध में सामने आया है कि ट्रॉमा के बाद उत्पन्न होने वाली मानसिक परेशानियां और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
आखिर ट्रॉमा या सदमा क्या है?
ट्रॉमा यानी ऐसा गहरा मानसिक आघात, जो किसी भयावह या दर्दनाक घटना के बाद व्यक्ति के मन और भावनाओं पर लंबे समय तक असर डाल सकता है। इसमें आग या धमाका, शारीरिक हमला, किसी करीबी की मौत या आत्महत्या, गंभीर बीमारी या बड़ी चोट जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अनुभव मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक सेहत को भी प्रभावित कर सकते हैं।
‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में प्रकाशित इस रिसर्च में 2,19,866 ऐसे वयस्कों का अध्ययन किया गया, जिन्होंने जीवन में किसी दर्दनाक घटना का सामना किया था। इनमें करीब 44,000 लोगों को आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। शोधकर्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिमों का विश्लेषण करने के लिए मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया और ऐसे 15 प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य कारकों की पहचान की, जो हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम से जुड़े पाए गए।
शराब का सहारा लेना है बेहद खतरनाक
रिसर्च में अत्यधिक शराब का सेवन हृदय संबंधी बीमारियों से जुड़े प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों में सामने आया। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी बड़े सदमे या दर्दनाक अनुभव के बाद लोग तनाव और भावनात्मक परेशानी से निपटने के लिए शराब का सहारा ले सकते हैं। लेकिन समय के साथ यह आदत मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।





